जीवन की पहली शिक्षक माँ ही होती हे

जीवन की पहली शिक्षक माँ ही होती हे
माँ चाहे अनपढ़ हो,, मगर हमारी पहली शिक्षक वाही होती है..!!
एक छोटा बच्चा अपनी माँ से नाराज होकर चिल्लाने लगा मे तुमसे नफरत करता हूँ
उसके बाद वह फटकारे जाने के डर से घर से भाग गया वह पहाड़ियों के
पास जाकर चीखने लगा
“मै तुमसे नफरत करता हूँ” और वही आवाज पहाड़ों मे गूँज ने लगी
उसने जिंदगी मे
पहली बार कोई गूँज सुनी थी
वह डर कर बचाव के
लिये माँ के पास भागा और बोला घाटी मे एक बुरा बच्चा है जो चिल्लाता है मे
तुमसे नफरत करता हूँ
उसकी माँ समझ गई और उसने अपने बेटे से कहा कि वह पहाड़ी पर जा कर फिर चिल्ला कर कहै मै तुम्हें प्यार करता हूँ
और बच्चे ने ऐसा ही किया ओर वही आवाज गूँजी इस घटना से बच्चे को एक सीख मिली
हमारा जीवन एक गूँज की तरह है हमें वही वापस मिलता है जो हम देते है जब आप दूसरों के लिये अच्छे बन जाते हो
तो खुद के लिये और भी बेहतर बन जाते हो….!

Author: Govind Gupta (गोविंद गुप्ता)

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