दुआ

हर लम्हा ज़िंदगी का एक कोरा सफहा है,
कूची ख्वाहिशों की लेकर तुम इसमें रंग भर लो ।

लेकर सुबह से सिंदूरी लाल,
आकृति नये जीवन की बनाना ।
फिर ले प्रणयी बासंती पीला,
नित नये तुम स्वप्न सजाना ।

मेहंदी से लेकर हरा रंग,
अपना सुंदर संसार रचाना ।
और ले विराट अम्बर से उसका रंग,
स्वयं को उसके साथ उठाना ।

फिर शुभ्र एक किनारी देकर,
नई उमंग की ज्योत जगाना ।
देना श्याम छोड़ निशा पर,
उसे है केवल हमें निभाना ।

Author: Anand Jain

हर लम्हा ज़िंदगी का एक कोरा सफहा है, कूची ख्वाहिशों की लेकर तुम इसमें रंग भर लो । लेकर सुबह से सिंदूरी लाल, आकृति नये जीवन की बनाना । फिर ले प्रणयी बासंती पीला, नित नये तुम स्वप्न सजाना । मेहंदी से लेकर हरा रंग, अपना सुंदर संसार रचाना । और ले विराट अम्बर से उसका रंग, स्वयं को उसके साथ उठाना । फिर शुभ्र एक किनारी देकर, नई उमंग की ज्योत जगाना । देना श्याम छोड़ निशा पर, उसे है केवल हमें निभाना । Author: Anand Jain

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