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धारा-144 के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी

इंदौर (पारस जैन) जिले में अब किसी विशेष दुकान, संस्थान आदि से दवाइयां तथा चिकित्सकीय सामग्री खरीदने और किसी विशेष लेब अथवा संस्थान आदि से चिकित्सकीय परीक्षण-जांच कराने के लिये मरीजों को बाध्य नहीं किया जा सकेगा। इस संबंध में कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री आकाश त्रिपाठी ने भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा-144 के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किये हैं। जारी आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध भारतीय दण्ड विधान की धारा 188 के अंतर्गत कार्यवाही की जायेगी। उक्त प्रतिबंधात्मक आदेश 9 दिसम्बर, 2014 से प्रभावशील होकर आगामी 6 फरवरी, 2015 तक लागू रहेगा।

कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री त्रिपाठी द्वारा जारी प्रतिबंधात्मक आदेश के अनुसार अब इंदौर जिले की राजस्व सीमा क्षेत्र में स्थापित किसी भी निजी नर्सिंग होम/निजी अस्पताल/निजी चिकित्सकों/किसी भी प्रकार के निजी चिकित्सा संस्थानों द्वारा किसी दुकान विशेष से दवाइयां और चिकित्सकीय उपकरणों को खरीदने तथा किसी विशेष लेब, संस्थानों आदि से चिकित्सकीय परीक्षण-जांच के लिये किसी भी मरीज को बाध्य नहीं किया जा सकेगा।

प्रत्येक निजी नर्सिंग होम, निजी अस्पतालों, निजी चिकित्सकों, निजी चिकित्सा संस्थानों द्वारा इस आशय की सूचना हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा में बड़े अक्षरों में अस्पताल परिसर में सदृश्य स्थलों जैसे रिसेप्शन एरिया, परिजन प्रतिक्षालय, लिफ्ट के भीतर, अस्पताल परिसर स्थित दवा दुकान, वार्डों, कमरों एवं सीढ़ियों पर बैनर के रूप में प्रदर्शित करना होगी। रोगी अपने इलाज में लगने वाली दवाइयां, चिकित्सकीय उपकरणों को कहीं से भी खरीदने एवं उपचार के दौरान कराये जाने वाले चिकित्सकीय परीक्षण को किसी लेब संस्थान से कराये जाने के लिये स्वतंत्र होंगे। इस आशय की सूचना को अस्पताल द्वारा जारी की जाने वाली पंजीकरण पर्ची, समय-समय पर दवा और अन्य सामग्री मंगाने वाली पर्चियों, रिपोर्ट,जांच पत्र, मेडिकल बिल, फाइल आदि पर भी स्पष्ट रूप से बड़े शब्दों में सील लगाकर अथवा प्रिंट कराकर हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में देना होगी।

जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा जिले के समस्त अनुविभागीय दण्डाधिकारी अपने-अपने क्षेत्राधिकार में स्थित शासकीय एवं निजी अस्पतालों नर्सिंग होम के मुख्य पर्यवेक्षक के रूप में कार्य करते हुये उनका नियमित एवं आकस्मिक निरीक्षण कर इस आदेश का प्रभावी पालन सुनिश्चित करायेंगे।

आदेश में कहा गया है कि निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम तथा निजी चिकित्सकों द्वारा मरीजों को अस्पताल, नर्सिंग होम परिसर में स्थित मेडिकल स्टोर्स अथवा अन्य चिन्हित मेडिकल स्टोर्स से ही दवाईयां एवं चिकित्सकीय उपकरण क्रय करने के लिये बाध्य किया जाता है अन्यथा ईलाज की सुविधा दिये जाने से इंकार कर दिया जाता है। इसी प्रकार विभिन्न प्रकार की पेथॉलाजीकल जाँचों एवं अन्य सभी प्रकार की जाँचों को करवाने के लिये अस्पताल, नर्सिंग होम परिसर में स्थित जॉच केन्द्रों अथवा अन्य चिन्हित जाँच केन्द्रों से ही सभी प्रकार के टेस्ट कराने के लिये विवश किया जाता है। ईलाज के लिये अस्पताल आये परिजनों की मुख्य चिन्ता अपने मरीज की गंभीर बीमारी के त्वरित ईलाज की होती है। ऐसी स्थिति में मजबूर होकर उन्हें स्थानीय बाजार की तुलना में दोगुने-तिगुने दामों पर दवा खरीदने, जाँच कराने के अलावा कोई विकल्प शेष नहीं बचता है। इस कारण आम नागरिकों को अत्यधिक मानसिक एवं आर्थिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ता है और चरम स्थिति में यह अस्पताल प्रबंधन एवं मरीज-परिजनों के मध्य बहस, मारपीट एवं तोड़फोड आदि का मुख्य कारण बनता है। जिले में जनसामान्य के हित जान-माल की सुरक्षा एवं लोक शांति को बनाये रखने के उद्देश्य से उक्त प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है।

इंदौर (पारस जैन) जिले में अब किसी विशेष दुकान, संस्थान आदि से दवाइयां तथा चिकित्सकीय सामग्री खरीदने और किसी विशेष लेब अथवा संस्थान आदि से चिकित्सकीय परीक्षण-जांच कराने के लिये मरीजों को बाध्य नहीं किया जा सकेगा। इस संबंध में कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री आकाश त्रिपाठी ने भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा-144 के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किये हैं। जारी आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध भारतीय दण्ड विधान की धारा 188 के अंतर्गत कार्यवाही की जायेगी। उक्त प्रतिबंधात्मक आदेश 9 दिसम्बर, 2014 से प्रभावशील होकर आगामी 6 फरवरी, 2015 तक लागू रहेगा। कलेक्टर एवं जिला…

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