महाशिवरात्रि पर होगा सर्वार्थ सिद्धि योग

भगवान शिव को अतिप्रिय महाशिवरात्रि का पर्व इस बार आज 20 फरवरी, 2012  (फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी) को मनाया जाएगा। मेरे अनुसार महाशिवरात्रि का पर्व इस बार कई विशेष संयोग लेकर आ रहा है, जो सभी के लिए शुभ फल देने वाले हैं।

इस बार महाशिवरात्रि का पर्व सोमवार को है चूंकि धर्म शास्त्रों में सोमवार के स्वामी स्वयं भगवान शिव को माना गया है इस दृष्टिकोण से इस बार महाशिवरात्रि का पर्व विशेष है। श्रवण नक्षत्र का चंद्रमा होने से इस दिन शिव पूजन करने वालों को धन धान्य व ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी।

इसके पहले महाशिवरात्रि और सोमवार का संयोग 1995, 1999, 2009 में भी बना था तथा 2016, 2019 व 2026 में भी महाशिवरात्रि का पर्व सोमवार को ही मनाया जाएगा।

सर्वार्थ सिद्धि योग भी हें आज
महाशिवरात्रि पर्व सोमवार को होने के अलावा इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग भी इस दिन बन है जो सभी के लिए शुभ फलदायी रहेगा।

इनसे करें पूजा
शिव पूजन के दौरान चांदी, दूध, शक्कर, बिल्व पत्र, बेल फल, घी, चंदन, भस्म, आंकडे का फूल, धतूरा, भांग कपूर व श्वेत वस्त्र का उपयोग कर शिव आराधना करने से जातक की सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

पूजा के शुभ मुहूर्त
इस बार महाशिवरात्रि को शिव जागरण व पूजा के लिहाज से पहला प्रहर शाम 6.29 बजे, दूसरा प्रहर रात 9.40 बजे, तीसरा प्रहर 12.50 बजे तथा चौथा सुबह 4.00 बजे श्रेष्ठ होगा।

महाशिवरात्रि पर करें जलाभिषेक , पायें पुण्य और लाभ
महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक से ज्योर्तिलिंगों की पूजा का पूर्ण लाभ मिलता है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार चार पहर की पूजा मनुष्य को परमतत्व प्रदान करती है। महाशिवरात्रि की महारात्रि को अहोरात्र भी कहा गया है। जो भक्तजन चार पहर की पूजा कर भगवान शिव की आराधना करते हैं उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।

फाल्गुन में हरिद्वार से ले जाया गया गंगा जल देश के विभिन्न शिवालयों में भगवान पर चढ़ाया जाता है। वास्तव में जलाभिषेक के साथ ही पूजा का क्रम प्रारम्भ हो जाता है। दिन में प्रारम्भ हुई पूजा अगली सुबह समाप्त होती है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान आशुतोष का जलाभिषेक कर दिया जाए तो निश्चय ही द्वादश ज्योर्तिलिंगों की पूजा और दर्शन का लाभ मिल जाता है।

देश के अनेक नगरों, कस्बों और देहातों में हरकी पैड़ी का गंगा जल वर्ष में दो बार कांवड़ यात्री चढ़ाते हैं। श्रावणी में शिव चौदस तथा फाल्गुन में शिवरात्रि के दिन गंगा जल चढ़ाने का महत्व विभिन्न धर्मशास्त्रों में दर्शाया गया है। शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि ही भगवान आशुतोष का असली पर्व है। इस दिन शिव और सती एकाकार हुए थे। शिवरात्रि ही एक मात्र ऐसा दिन है जिस दिन शिव पर चढ़ाया गया जल सती को भी प्राप्त होता है।

पशुपतिनाथ : शिव के इस नाम के पीछे का रहस्य
हिन्दू शैव ग्रंथों के मुताबिक शिव लीला ही सृष्टि, रक्षा और विनाश करने वाली है। वह अनादि, अनन्त हैं यानी उनका न जन्म होता है न अंत। वह साकार भी है और निराकार भी। इसलिए भगवान शिव कल्याणकारी हैं।

शिव को ऐसी शक्तियों और स्वरूप के कारण अनेक नामों से पुकारा और स्मरण किया जाता है। इन नामों में पशुपति भी प्रमुख है। शिव के इस नाम के पीछे का रहस्य शिव पुराण में बताया गया है।

एक नजर
शिव पुराण के मुताबिक भगवान ब्रह्मदेव से लेकर सभी सांसारिक जीव शिव के पशु हैं। इनके जीवन, पालन और नियंत्रण करने वाले भगवान शिव हैं। इन पशुओं के पति यानी स्वामी होने से ही शिव पशुपति हैं।

भगवान शिव ही इन पशुओं को माया और विषयों द्वारा बंधन में बांधते हैं। इनके द्वारा शिव ब्रह्मा सहित सभी जीवों को कर्म से जोड़ते हैं। पशुपति द्वारा ही बुद्धि, अहंकार से इन्द्रियां व पंचभूत बनते हैं, जिससे देह बनती हैं। जिसमें बुद्धि कर्तव्य और अहंकार अभिमान नियत करती है। साथ ही चित्त में चेतना, मन में संकल्प, ज्ञानेन्द्रियों द्वारा अपने विषय और कर्मेन्दियों द्वारा अपने नियत कर्म पशुपति की आज्ञा से ही संभव है।

पशुपति ही आराधना और भक्ति से प्रसन्न होकर ब्रह्म से लेकर कीट आदि पशु सभी को जन्म-मरण और सभी सांसारिक बंधनों से मुक्त करते हैं।

धर्मग्रंथों के मुताबिक अनादि, अनंत, सर्वव्यापी भगवान शिव की भक्ति दिन और रात के मिलन की घड़ी यानी प्रदोष काल और अर्द्धरात्रि में सिद्धि और साधना के लिए बहुत ही शुभ व मंगलकारी बताई गई है। इसलिए महाशिवरात्रि हो या प्रदोष तिथि शिव भक्ति से सभी सांसारिक इच्छाओं को पूरा करने का अचूक काल मानी जाती है।

धार्मिक पंरपराओं से परे क्या आपने विचार किया है कि शिव भक्ति के लिए महाशिवरात्रि, प्रदोष काल, शाम या रात का इतना महत्व क्यों है?

जानिए इन धर्म भावों से जुड़ा व्यावहारिक पहलू
दरअसल, हिन्दू धर्मग्रंथों में भगवान शिव को तमोगुणी व विनाशक शक्तियों का स्वामी भी माना गया है। रात्रि भी तमोगुणी यानी तम या अंधकार भरी होती है। जिसमें तामसी या बुरी शक्तियां हावी मानी जाती हैं, जो सांसारिक जीवों के लिए अशुभ व पीड़ादायी मानी गई है। लोक भाषा में इन शक्तियों को ही भूत-पिशाच पुकारा जाता है, शास्त्रों में शिव को इन भूतगणों का ही स्वामी और भूतभावन बताया गया है। जिन पर शिव का पूरा नियंत्रण होता है। इसलिए प्रदोष काल में शिव की पूजा इन बुरी शक्तियों के प्रभाव से बचाने वाली होती है।

इसमें व्यावहारिक पक्ष को समझें तो असल में दिन के वक्त सूर्य की ऊर्जा और प्रकाश से तन ऊर्जावान बना रहता है, रोग पैदा करने वाले जीव भी निष्क्रिय होते हैं। शरीर के स्वस्थ होने से मन व आत्मा में सत् यानी अच्छे विचारों के प्रवाह से बुरे या तामसी भावों का असर नहीं होता। शैव ग्रंथों में सूर्य को शिव का ही रूप माना गया है और शिव रूप वेद में भी सूर्य को जगत की आत्मा माना गया है। इस तरह सूर्य रूप शिव के प्रभाव से दिन में बुरी शक्तियां कमजोर हो जाती हैं।

वहीं दिन ढलते ही सत्वगुणी प्रकाश के जाने और तमोगुणी अंधकार के आने से तन, मन के भावों में बदलाव आता है। बुरे और तामसी भावों के हावी होने से मन, विचार और व्यवहार के दोष बड़े कलह और संताप पैदा करते हैं। यही दोष पैशाचिक प्रवृत्ति माने जाते हैं। जिन पर प्रभावी और तुरंत नियंत्रण के लिए ही रात्रि के आरंभ में यानी प्रदोष काल में आसान उपायों से प्रसन्न होने वाले देवता और भूतों के स्वामी शिव यानी आशुतोष की पूजा बहुत ही शुभ और संकटनाशक मानी गई है।

इसी भाव और श्रद्धा से यह मान्यता भी प्रचलित है कि शिव रात्रि के स्वामी हैं और प्रदोष काल यानी शाम के वक्त शिव कल्याण भाव से भ्रमण पर निकलते हैं। यहीं नहीं पौराणिक मान्यता भी है कि ज्योर्तिलिंग का प्राकट्य भी अर्द्धरात्रि यानी महाशिवरात्रि को माना गया है। जिसमें संकेत यही है कि अशुभ और बुराई से बचना है तो शुभ और सद्भावों से जुड़ें।

पंडित “विशाल” दयानन्द शास्त्री

भगवान शिव को अतिप्रिय महाशिवरात्रि का पर्व इस बार आज 20 फरवरी, 2012  (फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी) को मनाया जाएगा। मेरे अनुसार महाशिवरात्रि का पर्व इस बार कई विशेष संयोग लेकर आ रहा है, जो सभी के लिए शुभ फल देने वाले हैं। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व सोमवार को है चूंकि धर्म शास्त्रों में सोमवार के स्वामी स्वयं भगवान शिव को माना गया है इस दृष्टिकोण से इस बार महाशिवरात्रि का पर्व विशेष है। श्रवण नक्षत्र का चंद्रमा होने से इस दिन शिव पूजन करने वालों को धन धान्य व ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी। इसके पहले महाशिवरात्रि और सोमवार का संयोग…

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