रूठो मत

रूठो मत… बटवारा कर लो,
रंगीन टुकड़े चूडियो के तुम रख लो,
सूखे सुर्ख गुलाब मै रख लेती हूँ !
रेत से चुने शंख सीपी तुम ले लो,
ठंडी हवाओं की सिहरन मै ले लेती हूँ !
तुम अपनी तस्वीर वापिस ले लो,
मै तुम्हारी यादें लिए लेती हूँ !
सारी खुशियाँ तुम्हारी,
मै गम के सहारे जिए लेती हूँ !

Author: Jyotsna Saxena (ज्योत्सना सक्सेना)

 

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