लड़की के माता-पिता को प्रोत्साहित करना चाहिये

इंदौर | जिला प्रशासन के तत्वावधान में आज श्रीमाया रेसीडेंसी होटल में पत्रकारों के लिये गर्भाधान पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम (पीसी-पीएनडीटी ऐक्ट) के संबंध में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला को सम्बोधित करते हुये अपर कलेक्टर श्री सुधीर कुमार कोचर ने कहा कि जिले में पीसी-पीएनडीटी ऐक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन जारी है, जिसके परिणाम स्वरूप पिछले 5 वर्षों में स्त्री-पुरूष लिंगानुपात में जिले में उल्लेखनीय सुधार आया है। उन्होंने कहा कि मीडियाकर्मियों को एक या दो लड़की वाले माता-पिता की सफलता की कहानी जारी कर प्रोत्साहित करना चाहिये।

उन्होंने यह भी कहा कि मीडियाकर्मी लिंग परीक्षण वाले विज्ञापन से सर्वथा दूर रहना चाहिये। उन्होंने यह भी कहा कि कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिये शासन और प्रशासन को हर संभव कोशिश करना पड़ेगी। गर्भस्थ भ्रूण का लिंग परीक्षण करना और करवाना न केवल कानूनन दण्डनीय अपराध है,बल्कि अनैतिक भी है। यदि समाज में ऐसी कोई घटना घट रही है तो आप अपनी चुप्पी तोड़िये और प्रशासन को सूचना दीजिये। सर्वप्रथम स्वयं से शुरूआत कीजिये और अपने परिवार और समाज को जागृत कीजिये। भ्रूण के लिंग परीक्षण की सूचना हेल्प लाइन नम्बर 1800-233-3130 पर भी दी जा सकती है। भ्रूण लिंग परीक्षण की सूचना देने पर सूचनादाता को मध्यप्रदेश शासन द्वारा एक लाख रुपये का पुरस्कार घोषित किया गया है। इसके अतिरिक्त जिला प्रशासन इंदौर द्वारा विशेष पहल करते हुये सूचना देने वाले व्यक्ति को 5 हजार रुपये अतिरिक्त पुरस्कार दिया जायेगा। पुरस्कार की राशि सूचना की पुष्टि होने के बाद प्रदान की जायेगी। सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम गोपनीय रखा जायेगा।

उन्होंने कहा कि पुरूष प्रधान सामाजिक व्यवस्था में कुछ लोग अपने रीति-रिवाजों, अंधविश्वासों और सामाजिक कारणों से बेटियों से जीने का अधिकार छीन लेते हैं, जिसका असर पिछले कुछ दशकों में शिशु लिंग अनुपात एवं स्त्री-पुरूष अनुपात पर स्पष्ट दिखाई देना लगा है। परम्परिक सोच और आधुनिक तकनीकी साधनों के दुरुपयोग के सम्मिलन का परिणाम अब हमारे सामने आने लगा है, जिसे रोकने की जरूरत है।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश बालिन्टरी हेल्थ एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक श्री मुकेश कुमार सिन्हा ने पत्रकारों को बताया कि कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिये जिला प्रशासन द्वारा तकनीकी संसाधनों का उपयोग करते हुये ट्रैकर लगाये गये हैं। सोनोग्राफी सेंटरों का आकस्मिक निरीक्षण किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में लिंगानुपात एक हजार पुरुषों पर 918 स्त्रियां हैं जो कि राष्ट्रीय अनुपात से एक कम है। शोध करने के उपरांत यह पाया गया कि प्रथम संतान के समय लिंग परीक्षण नहीं किया जा रहा है, द्वितीय और तृतीय संतान के समय लिंग परीक्षण किया जा रहा है, जिसके कारण लिंगानुपात गड़बड़ हो रहा है। अगर हम सचेत नहीं हुये तो आगे और भी स्थिति खराब होगी। कन्या भ्रूण हत्या रोकने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है व लिंग भेदभाव समाप्त करने, लड़कियों को शिक्षित करने, महिलाओं की सामाजिक स्थिति में सुधार करने और पीसी-पीएनडीटी ऐक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन में मददगार साबित हो सकता है। जिला प्रशासन द्वारा सशक्त जिला सलाहकार समिति और तकनीकी साधनों का उपयोग करके कन्या भ्रूण हत्या पर प्रभावी रोक लगायी गयी है। जिला प्रशासन द्वारा कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिये निरीक्षण, निगरानी और ट्रैकर मशीन का उपयोग किया जा रहा है। सोनोग्राफी करने वाले डॉक्टरों और कराने वाले रोगियों से फार्म-एफ भराये जा रहे है, उनसे एड्रेसप्रूफ भी लिया लिया जा रहा है। एड्रेसप्रूफ के लिये रोगियों के लिये 10 विकल्प दिये गये हैं, जिससे प्रभावी नियंत्रण कायम हुआ है।

कार्यक्रम को स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीमती प्रियदर्शनी पाण्डे ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर पीएनडीटी ऐक्ट के नोडल अधिकारी श्री सतीश जोशी तथा बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद थे।

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