राम और मर्यादा पुरषोत्तम राम

राम सिर्फ दो अक्षर का नाम भर नहीं है, रामनाम तो प्रत्येक प्राणी की चेतना में सांस की तरह बसा हुआ है, राम चेतना और सजीवता का प्रतीक हैं। अगर राम नहीं तो जीवन मरा है। भारतीय समाज में मर्यादा, आदर्श, विनय, विवेक, नेतृत्व, मित्रता, वीरता, एकाग्रता, लोकतांत्रिक मूल्यों और संयम का नाम राम है। राम प्रतिनिधित्व करते हैं मानवीय मूल्यों की मर्यादा का। राम के समावेशी चरित्र में व्यक्ति, समाज और राष्ट्र निर्माण का सारा विधान और समस्त अभिव्यक्तियां मौजूद हैं।

जो पुरुषो में सर्वोत्तम हो, जो स्वयं से पहले दूसरों के हित की चिंता करे, जिसका आचरण सब पुरुषो के लिए अनुसरण योग्य हो, जो परोपकारी हो, जिसका स्वभाव सरल हो, जो ज्ञानी हो, जो भय से नहीं बल्कि मन से मान-सम्मान का अधिकारी हो, जिसकी मर्यादा सर्वोत्तम हो, ऐसे पुरुष को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है ।

राम अपने विभिन्न रूपो यथा माता कौशल्या और पिता दशरथ के लिए एक आदर्श पुत्र, गुरुजनों के लिए आदर्श शिष्य, भरत, लक्षमण और शत्रुघन  के लिए आदर्श भाई, सीता के लिए आदर्श पति, हनुमान के लिए आदर्श मित्र, प्रजा के लिए आदर्श राजा, सेना के लिए एक आदर्श सेनापति के रूप मे सामने आए।

वास्तव में भगवान श्री राम चंद्र जी ने अपने जीवन से पुरुष के चरित्र को परिभाषित किया कि किस तरह का आचरण एक
पुरुष को अपने जीवन में करना चाहिए । अपने कर्तव्यों के पालन के लिए स्वहित को महत्वहीन समझा । उन्होंने अपने कर्म और धर्म के माध्यम से जीवन की कठनाईयो को सुगम बनाते हुए हर वचन की मर्यादा को पूरा किया । इसीलिए वो मर्यादा पुरषोत्तम कहलाए।

आज जब सम्पूर्ण विश्व में लोगों में मर्यादाओं को तोड़ने की होड़ मची है, तो राम के इस मर्यादित रूप की अहमियत और बढ़ गई है, श्री राम जी का जीवन प्रेरणादायक है, इस रामनवमी पर आप सभी उनके जीवन से आप सभी प्रेरणा लें तथा उनके जैसा बनने का भरसक प्रयास करें । राम नवमी की शुभकामनाएं, जय श्रीराम।
लेखक :- राजकुमार जैन (स्वतंत्र विचारक)

Review Overview

User Rating: Be the first one !

: यह भी पढ़े :

Anant Chaturdashi 2022

दो साल बाद अखाड़ों के साथ निकला झिलमिल झांकियों का कारवां

मुंबई के बाद प्रदेश में इंदौर ही ऐसा इकलौता शहर है, जहां गणेश उत्सव को …

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Translate »