Tag Archives: Amit Mandloi

चिता का ये धुआं

Indore Dil Se - Artical

मैं नहीं जानता प्राण देह से अर्जित ज्ञान और अनुभव का कितना हिस्सा जाते वक्त पार्थिव में छोडक़र जाता है। अगर वह सारे कोष खाली कर देह को अपशिष्ट की तरह छोड़ जाता हो तब भी प्राण के संसर्ग से अर्जित मेधा का कुछ अंश तो रह ही जाता होगा। मैं चाहता हूं कि वह देह जब अग्नि को समर्पित ...

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जब हम यमदूत का इंतजार करते हैं

Indore Dil Se - Artical

जीवन जितनी सहजता से जीया जा सकता है, उतनी ही असहज मृत्यु हो सकती है। खासकर तब जब वह देहरी पर आकर खड़ी हो जाए। न भीतर आए न बाहर जाए। वह द्वार पर खड़ी है, उस भिक्षुक की तरह जो न कटोरा आगे करता है और न पैर आगे बढ़ाता है। गृह स्वामी संकोच में है कि अब इसका ...

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