Tag Archives: Firdaus Khan

मिलावटी मिठाइयों से सावधान !

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त्यौहार के दिनों मे बाज़ार में नक़ली मावे और पनीर से बनी मिठाइयों का कारोबार ज़ोर पकड़ लेता है. आए-दिन छापामारी की ख़बरें सुनने को मिलती हैं कि फ़लां जगह इतना नक़ली या मिलावटी मावा पकड़ा गया, फ़लां जगह इतना. इन मामलों में केस भी दर्ज होते हैं, गिरफ़्तारियां भी होती हैं और दोषियों को सज़ा भी होती है. इस ...

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मैं तुझे फिर मिलूंगी

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अमृता प्रीतम की रचनाओं को पढ़कर हमेशा सुकून मिलता है. शायद इसलिए कि उन्होंने भी वही लिखा जिसे उन्होंने जिया. अमृता प्रीतम ने ज़िंदगी के विभिन्न रंगों को अपने शब्दों में पिरोकर रचनाओं के रूप में दुनिया के सामने रखा. पंजाब के गुजरांवाला में 31 अगस्त, 1919 में जन्मी अमृता प्रीतम पंजाबी की लोकप्रिय लेखिका थीं. उन्हें पंजाबी भाषा की ...

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सिर्फ़ अपनी पीठ न थपथपाये सरकार

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देश में आज भी छोटे-बड़े क़स्बों और गांव-देहात में पारंपरिक चूल्हे पर खाना पकाया जाता है। इनमें लकड़ियां और उपले जलाए जाते हैं। इसके अलावा अंगीठी का भी इस्तेमाल किया जाता है। अंगीठी में लकड़ी और पत्थर के कोयले जलाए जाते हैं। लकड़ी के बुरादे, काठी और तेंदुए के पत्तों से भी अंगीठी दहकाई जाती है। ऐसी अंगीठियां अमूमन उन ...

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बयानबाज़ी नहीं, कार्रवाई होनी चाहिए

Indore Dil Se - Artical

गंगा-जमुनी तहज़ीब हमारे देश की रूह है. संतों-फ़क़ीरों ने इसे परवान चढ़ाया है. प्रेम और भाईचारा इस देश की मिट्टी के ज़र्रे-ज़र्रे में है. कश्मीर से कन्याकुमारी तक हमारे देश की संस्कृति के कई इंद्रधनुषी रंग देखने को मिलते हैं. प्राकृतिक तौर पर विविधता है, कहीं बर्फ़ से ढके पहाड़ हैं, कहीं घने जंगल हैं, कहीं कल-कल करती नदियां हैं, ...

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सुनने की फुर्सत हो तो आवाज़ है पत्थरों में

Indore Dil Se - Edito

ये कहानी है दिल्ली के ’शहज़ादे’ और हिसार की ’शहज़ादी’ की. उनकी मुहब्बत की. गूजरी महल की तामीर का तसव्वुर सुलतान फ़िरोज़शाह तुगलक़ ने अपनी महबूबा के रहने के लिए किया था…शायद यह किसी भी महबूब का अपनी महबूबा को परिस्तान में बसाने का ख़्वाब ही हो सकता था और जब गूहरी महल की तामीर की गई होगी…तब इसकी बनावट, ...

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मुद्दा सरकारी सुविधाओं के दुरुपयोग का

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भारत एक ऐसा देश है, जिसमें निज़ाम के लिहाज़ से कई देश बसते हैं. देश का एक निज़ाम अमीरों के लिए है, राजनेताओं के लिए है, प्रभावशाली लोगों के लिए है. ये सरकारी निज़ाम इनके एक इशारे पर इन्हें तमाम सुविधाएं मुहैया कराता है. इनमें वे सुविधाएं भी शामिल हैं, जिनकी इन्हें कोई ख़ास ज़रूरत नहीं होती. मसलन, बीमार होने ...

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नेशनल हेराल्ड से उम्मीद जगी

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अख़बारों का काम ख़बरों और विचारों को जन मानस तक पहुंचाना होता है. सूचनाओं के इसी प्रसार-प्रचार को पत्रकारिता कहा जाता है. किसी ज़माने में मुनादी के ज़रिये हुकमरान अपनी बात अवाम तक पहुंचाते थे. लोकगीतों के ज़रिये भी हुकुमत के फ़ैसलों की ख़बरें अवाम तक पहुंचाई जाती थीं. वक़्त के साथ-साथ सूचनाओं के आदान-प्रदान के तरीक़ों में भी बदलाव ...

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जनवादी पत्रकारिता की बात करें

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ख़बरों और विचारों को जन मानस तक पहुंचाना ही पत्रकारिता है. किसी ज़माने में मुनादी के ज़रिये हुकमरान अपनी बात अवाम तक पहुंचाते थे. लोकगीतों के ज़रिये भी हुकुमत के फ़ैसलों की ख़बरें अवाम तक पहुंचाई जाती थीं. वक़्त के साथ-साथ सूचनाओं के आदान-प्रदान के तरीक़ों में भी बदलाव आया. पहले जो काम मुनादी के ज़रिये हुआ करते थे, अब ...

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