माँ अन्नपूर्णा की पूजा और कथा

अन्नपूर्णा माता को हिंदू धर्म में भोजन की देवी माना जाता है। उन्हें समृद्धि, सम्पत्ति, और संपूर्णता की देवी के रूप में पूजा जाता है। अन्नपूर्णा का अर्थ होता है…

ज्येष्ठ पूर्णिमा वट सावित्री व्रत

सनातन धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा पड़ती है। ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत 22 जून…

कर्मबंधन

एक राजा बड़ा धर्मात्मा, न्यायकारी और परमेश्वर का भक्त था। उसने ठाकुरजी का मंदिर बनवाया और एक ब्राह्मण को उसका पुजारी नियुक्त किया। वह ब्राह्मण बड़ा सदाचारी, धर्मात्मा और संतोषी…

राजा भोज का प्रश्नन

ऐसा कौन सा कुआं है जिसमें गिरने के बाद आदमी बाहर नहीं निकल पाता ? एक बार राजा भोज के दरबार में एक सवाल उठा कि ऐसा कौन सा कुआं…

“मैं न होता, तो क्या होता?”

सुंदरकांड का एक प्रसंग अवश्य पढ़ें और अपने जीवन में ऊतारे…. ” मैं न होता, तो क्या होता ? “ना मैं श्रेष्ठ हूँ,ना ही मैं ख़ास हूँ,मैं तो बस छोटा…

सब मे राम

तुलसीदास जी जब “रामचरितमानस” लिख रहे थे, तो उन्होंने एक चौपाई लिखी : — सिय राम मय सब जग जानी।करहु प्रणाम जोरी जुग पानी।। अर्थात :- पूरे संसार में श्री…

मूर्ति में क्यों बसते हैं भगवान

क्यों भगवान मूर्ति में उपस्थित हो जाते हैं और पत्थर की मूर्ति भगवान बन जाती है ? भगवान के अर्चावतार से सम्बधित एक भक्ति कथा । किसी नए काम को…

समर्पण का भाव

एक बार एक बेहद ख़ूबसूरत महिला समुद्र के किनारे रेत पर टहल रही थी।समुद्र की लहरों के साथ कोई एक बहुत चमकदार पत्थर छोर पर आ गया।महिला ने वह नायाब…

वाणी पर नियंत्रण

क बार की बात है,नयासर गांव में एक ईमानदार लड़का रहता था,वह सभी से प्यार से बाते करता था जिससे जलन के मारे एक बार एक बूढ़े आदमी ने अफवाह…

सत्यसनातनधर्मो विजयतेतराम् – रक्षाबंधन पर्व इतिहास के वातायन से

भारतीय प्राचीन त्योहारों में रक्षाबंधन का विशिष्ट स्थान है। रक्षा-बंधन का अर्थ है – रक्षा का बंधन। रक्षाबंधन एक सामाजिक, पौराणिक, धार्मिक और ऐतिहासिक भावना के धागे से बना एक…