Poet’s Corner

“मां से सीखा है” – मदर्स डे स्पेशल

मां को बच्चों की प्रथम गुरु कहा है।मां हमेशा अपने बच्चों को सही-गलत और जीवन के महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाती है।जीवन में जब भी कुछ समझ नहीं आता, कोई रास्ता नहीं सूझता तो मां से बात करने से उनकी गोद में सिर रखकर अपने मन का हाल उन्हें बताने से हमें नया रास्ता भी मिल जाता है और एक उम्मीद भी ...

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तुम अस्पताल के लिये लड़े कब ?

तुम अस्पताल के लिये लड़े कब ??तुम तो नक्सलियों के साथ देश के विरुद्ध ही लड़ते रहे..तुम तो पुलिस, CRPF और पैरामिलेट्री फोर्स से RDX बिछाकर , बम से उड़ाकर और घात लगाकर लड़ते रहे .. तुम अस्पताल के लिये लड़े कब ?तुम तो कभी नार्थईस्ट, तो कभी पंजाब , तो कभी कश्मीर को भारत से अलग करने के लिये ...

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उन सभी बेटियों को समर्पित, जो दूर, अपने संसार में व्यस्त हैं, और अपने घर गृहस्थी कि कर्तव्य निभा रहीं हैं…

माँ का घर ,जो अब भी नहीं भूला !! बरसों बीत गए ,उस घर से विदा हुए ,बरसों बीत गए ,नई दुनिया बसाए हुए ,पर न जानें क्या बात है ?शाम ढलते ही मन ,उस घर पहुँच जाता है !! माँ की आवाज़ सुनने को ,मन आज भी तरसता है ,महक माँ के खाने की ,आज भी दिल भरमाती है ...

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।। पटाक्षेप ।।

ये विरासतये फलसफेये शोहरतेंये नामावरीये सियासत एक दिनसब रह जाएगापीछे बहुत पीछेजब वक़्त से आगेनिकल जायेंगे हम यकीं नहीं आताजब तलकवह समय नहीं आताआदमी अचानकचला नहीं जाता जिंदगी अच्छी औरसच्ची लगती हैमुस्कुराती हुईहंसती खेलतीनटखट नाटक सी मशीन रुकने सीबंद होती धड़कनेंदिमाग मर जाता कभीमौत हकीकत बन फख्र सेदर्ज होती प्रमाण पत्र में रास्ते ढूंढ़ती हैपगडंडियों से आती हैखुले राजपथ परशान ...

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कहना ज़रूर

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कभी जो आये मन में कोई बातउसे कहना ज़रूरन करना वक्त का इंतज़ारन होना मगरूर । जब पिता का किया कुछदिल को छू जायेतो जाकर गले उनकेलगना ज़रूर।कभी जो आये मन में कोई बातउसे कहना ज़रूर बनाये जब माँ कुछ तुम्हारे मन काकांपते हाथों कोचूम लेना ज़रूर।कभी जो आये मन में कोई बातउसे कहना ज़रूर जब अस्त व्यस्त होके बीबीभूल ...

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माँ… तुम लौट आओ ना!

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बटोही में बनाकर दाल जीरे का छौंक लगाओ ना बहुत भूखा हूँ चूल्हे की गरम रोटी खिलाओ ना दीवाली आ रही है माँ नए कपड़े सिलाओ ना माँ…तुम लौट आओ माँ। बच्चों को पढ़ाकर थककर तुम स्कूल से लौटो अनर्गल मैं आलापों से तुम्हें नाराज़ कर दूं तो जैसे तब दिखाती थीं वही गुस्सा दिखाओ ना माँ…तुम लौट आओ माँ। ...

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कफन

कफ़न ओढ़ कर मैं चला बिना चलाये पाँव लोग कांधे बदलते रहे ले जाने को श्मशान क्या क्या नही कमाया करके श्रम दिन और रात कफ़न मिला बिना जेब का जाना पड़ा खाली हाथ जो सारी उम्र कफ़न पहनने से हिचकते रहे मरने पर बड़ी मजबूरी में कफनान्तर्गत रहे है मेरा कफ़न तेरे कफ़न से ज्यादा सफेद क्यों मेने वह ...

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“मैंने दहेज़ नहीं माँगा”

साहब मैं थाने नहीं आउंगा,अपने इस घर से कहीं नहीं जाउंगा,माना पत्नी से थोड़ा मन-मुटाव था,सोच में अन्तर और विचारों में खिंचाव था,पर यकीन मानिए साहब, “मैंने दहेज़ नहीं माँगा”मानता हूँ कानून आज पत्नी के पास है,महिलाओं का समाज में हो रहा विकास है।चाहत मेरी भी बस ये थी कि माँ बाप का सम्मान हो,उन्हें भी समझे माता पिता, न ...

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पत्रकार है…

Indore Dil Se - Poets Corner

तू जानती है न मां, तेरा बेटा पत्रकार है…मां तू नाराज न होना इस दिवाली मैं नहीं आ पाउंगातेरी मिठाई मैं नहीं खा पाउंगादिवाली है तुझे खुश दिखना होगाशुभ लाभ तुझे खुद लिखना होगातू जानती है यह पूरे देश का त्योहार हैऔर यह भी मां कि तेरा बेटा पत्रकार हैमैं जानता हुं पड़ोसी बच्चे पटाखे जलाते होंगे तोरन से अपना घर ...

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मॉं

Dr Manisha Sharma

मॉं है ईश्वर की इबादत मॉं है प्रेम की ईबारत मॉं है मन में श्रद्धा का भाव मॉं है धूप में गुलमोहर की छॉंव मॉं है अपनत्व की सेज मॉं है सूरज का तेज मॉं है ममता का सागर मॉं है खुशियों की गागर मॉं है शीतल सी चॉंदनी मॉं है सुरो की रागिनी मॉं है दीपों का पर्व मॉं ...

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