मधुर स्मृति शेष

तुम्हे न भूल पाएंगे गजोधर भैया – मधुर स्मृति शेष

इस जीवन की आपा – धापी, गला – काट प्रतिस्पर्धा में दो जून की रोटी कमाने में ही लोग बेहद मुश्किलों और परेशानियों के दौर से गुजर रहे हैं… जिम्मेदारियों और बेतहाशा महंगाई ने जीवन को दूभर और जटिल कर रखा है… वर्तमान दौर में आमजनों की स्तिथि बेहद नाजुक बनी हुई है… ऐसे माहौल में और ऐसे  दौर में एक मामूली शक्ल दिखने वाले शख़्स ने लोगों को कॉमेडी के माध्यम से बरसों से काफी राहत प्रदान की… उनके दुःख – दर्द को छू – मंतर किया… उनके रंजो – गम को उड़ाया… राजू उर्फ गजोधर ने अपने अद्भुत, दिलकश अंदाज से, शैली से कॉमेडी के क्षेत्र को एक नया मुकाम ही प्रदान नही किया बल्कि आमजनों को हसा – हसाकर के लोट – पोट भी किया…  अपने जोक्स के द्वारा, अपने विभिन्न प्रसंग के माध्यम से लोगों को भरपूर गुदगुदाया और उनके तमाम तकलीफों को भुलवाकर खूब हंसाया… उच्च वर्ग के लिए मनोरंजन के कई साधन और संसाधन मौजूद है लेकिन निम्न वर्ग और मध्यमवर्ग के मनोरंजन के लिए तो गजोधर एकमात्र और बेहतरीन विकल्प साबित हुए और गजोधर ने लोगों से भरपूर न्याय भी किया…

वैसे तो कई अन्य कॉमेडियन भी आए और गए उन्होंने भी कुछ हद तक मनोरंजन किया और हंसाया भी… लेकिन राजू की  खासियत रही कि उन्होंने  अपनी कॉमेडी में आमजन के जीवन के हर रंग, हर विषय, हर प्रसंग ,हर पहलू को छुआ और उन्हें अपने बेहतरीन अंदाज से उसमें शुमार किया… अपनी कॉमेडी में अपनी बॉडी लैंग्वेज, नृत्य, मिमक्री का तड़का देकर कॉमेडी किंग बने और वर्चस्व भी हासिल किया…

आज के ज़माने में जहां पूरी दुनिया आपको रुलाने में लगी हो, दुखी करने में भिड़ी हो… टांग खींचने में लगी हो…ऐसे में व्यथित, पीड़ित, लुटी – पिटी आमजन के लिए राजू की कॉमेडी ने वर्षों से निसंदेह मेडिसिन और टॉनिक का काम किया… किसी को हंसाना और उसे भीतर तक गुदगुदाना कोई मामूली कार्य नही है वो भी मर्यादा और हद में रहकर… ये अद्भुत कार्य सिर्फ हमारे गजोधर भैया ही कर सकते थे… अपनी कॉमेडी में काल्पनिक पात्रों की रचना और शैली भी कमाल की रही और बेजोड़ भी…

कॉमेडी के माध्यम से शीर्ष पर पहुंचना और एक मुकाम हासिल करना तथा लोगों के दिलों पर कब्ज़ा करना कोई मामूली काम नही है… उनके रचित कीर्तिमान को कोई छू भी नहीं सकता है… उनके कई विषय और एपिसोड तो ऐसे जबरदस्त हैं कि लोग उन्हें बारंबार देखते है और खुद को रिचार्ज करते है और आनंदित हो जाते है… कोविड जैसे अवसाद और डिप्रेशन के नाजुक दौर में में भी गजोधर की कॉमेडी ने कई लोगों को उबारा…

राजू ने भले शरीर त्याग दिया है और वे इस मृत्युलोक से रवाना हो चुके है… लेकिन वे अपनी बेमिसाल, लाजवाब और अद्भुत कॉमेडी के माध्यम से सदैव  हमारे दिलों पर राज करेंगे और हमें हमारी जीवन की जंग में गुदगुदाते रहेंगे और हंसाते भी रहेंगे… गजोधर भैया को नही भूल पाएंगे… कोटि  – कोटि  नमन

लेखक :- राजेश उषा शर्मा, इंदौर

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