मेरे मन की, पिता के मन की,
सारे भावों को जान लेती है।
ज़िन्दगी को मुद्दत से देखती आई है,
हर दुख-दर्द को सहती आई है।
अपने ऊपर हर कष्ट लेकर,
आँचल का छाँव देती आई है॥
मेरी दादी माँ, मेरे और मेरे पिता के,
संग संग हर पल, हर वक़्त रहती है॥
मेरे मन की, पिता के मन की,
सारे भावों को जान लेती है।
ज़िन्दगी को मुद्दत से देखती आई है,
हर दुख-दर्द को सहती आई है।
अपने ऊपर हर कष्ट लेकर,
आँचल का छाँव देती आई है॥
मेरी दादी माँ, मेरे और मेरे पिता के,
संग संग हर पल, हर वक़्त रहती है॥
भागीरथपुरा, इंदौर में दूषित जल के कारण लगभग तेरह लोगों की मौत की घटना ने मध्य प्रदेश शासन पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। ऐसी त्रासदियों में जनता का पहला…
ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं,है अपना ये त्यौहार नहींहै अपनी ये तो रीत नहीं,है अपना ये व्यवहार नहींधरा ठिठुरती है सर्दी से,आकाश में कोहरा गहरा हैबाग़ बाज़ारों की सरहद…