Editorial / Article

डर से कैसे बचा जाए…?

ओशो गजब का ज्ञान दे गये, कोरोना जैसी जगत बिमारी के लिए…..70 के दशक में हैजा भी महामारी के रूप में पूरे विश्व में फैला था, तब अमेरिका में किसी ने ओशो रजनीश जी से प्रश्न किया… "ओशो" -“इस महामारी से कैसे बचे ?” ओशो ने विस्तार से जो समझाया वो आज कोरोना के सम्बंध में भी बिल्कुल प्रासंगिक है। ...

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अंतरात्मा से जागिये, लाभ का लोभ तो छोड़िए

यह आलेख पंद्रह दिन पहले लिखा था… जिसमें गुजारिश की गई थी इस आपदाकाल मे हर कोई लाभ का लोभ छोड़े और इस विषम परिस्थिति से निबटने में सहायक हो..इसके तत्काल बाद इंडियन मेडिकल एसो ने डॉक्टरों की निशुल्क सलाहकार टीम तैयार कर दी, इंदौर कलेक्टर ने भी इसमें योग दिया, आज उन्होंने एक बड़ा राहत का कार्य किया, सौ ...

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“कोरोना की दूसरी लहर”

कोरोना की दूसरी लहर के साथ दोगुनी लापरवाही भी देखने को मिल रही है लोग जहां कुंभ में शाही स्नान कर रहे हैं वहीं चुनावों में नेता जन सभा और रेलियां कर रहे हैं और हद की बात तो ये है कि शाही स्नान हो या रेलियां दोनों ही जगह बढ़ – चढ़कर लोग शामिल हो रहे हैं।अब सवाल उठता ...

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महिला दिवस पर विशेष

हर बार महिला दिवस पर हम महिलाओं के सम्मान की, उनकी तरक्की की और उनके द्वारा हासिल किए गए पुरुस्कारों के बारे में बातें करते हैं, महिलाओं ने समाज से, समाज की कुरीतियों से और बाहर की दुनिया से जंग किस बहादुरी से लड़ी सब जानते हैं, क्योंकि ये बातें हमें बताई जाती हैं, पर आज मैं कुछ अलग कहना ...

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आसिफ बसरा अलविदा

आसिफ के कुछ निर्देशक मित्रों से यह बात पता चली की आसिफ अक्सर बोला करते थेहमारी फ़िल्म इंडस्ट्री स्टार अदाकारों पर केंद्रित है जबकि जितनी महत्ता हीरो की होती है उतनी महत्ता चरित्र अभिनेताओं की भी होती है, लेकिन अफसोस सहयोगी अदाकारों को उतना महत्व नही मिल पाता है।आसिफ 12 नवम्बर को फांसी के फंदे पर झूल गए और आसिफ ...

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बागियों की पाला-बदल कबड्डी.. कबड्डी… कबड्डी…

कबड्डी भारत का एक अति-प्राचीन खेल है | संयोग से वरिष्ठता में राजनीति उससे भी ज्यादा प्राचीन शतरंजी खेल है | शायद इसीलिए टांग खींचना दोनों खेलों में एक कॉमन विशेषता होती है | वैसे तो प्रत्यक्ष तौर पर दोनों खेलों में कोई साम्य नहीं है | मगर फिर भी कई साझा तुलनाएं अवश्य हैं | दोनों ही खेलों में ...

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अलविदा राहत कुरेशी इंदौरी साहब

बुलंद आवाज़- खनकदार तलफ़्फ़ुज़, रौबदार शख्सियत, लाखो अशआर, नज़्में, शेरो शायरी, नग़्मे जो उन्हें मकबूलियत और मारूफियत के साथ तकयामत तक हमारे बीच मे छोड़ गए वह थे राहत इंदौरी साहब हम राहत नामा लिखने निकले तो यह उम्र छोटी पड़ जाएगी, मेरे कुछ दोस्तों ने राहत साहब और फिल्मों पर कुछ लिखने की इल्तिजा की। राहत साहब के कुछ ...

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रेनकोट में शराफत से भीगता आमआदमी !

बारिश का मौसम अपने शबाब पर है | रेनकोट पहने लोग सड़कों पर कदमताल कर रहे हैं | पता नहीं रेनकोट पहने लोग कदमताल कर रहे हैं या फिर लोगों को अपने भीतर समेटे रेनकोट छपाक-छई का खेल खेल रहे हैं | मुद्दे की बात यह है कि यदि रेनकोट बारिश में घर से बाहर निकलने का नैतिक साहस ना ...

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अविवाद की कॉलर पकड़ते विवादी विवाद !

पहले किसी दौर में मुद्दों को विवादित बनाने के लिए दबे-छुपे सयानेपन के साथ आपसदारी में उलझाने का चलन हुआ करता था | तब एक नैतिक शर्मदारी का तकाज़ा भी हुआ करता था जिसके चलते यह काम पर्दे की ओंट में छुपकर किसी आखेट के जैसा मुक़म्मल किया जाता था | तब विवाद हो गुजरने के बाद अ-विवादी को पता ...

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स्त्री के खुले बाल , शोक और अशुद्धि की निशानी

आजकल मातायें बहनें फैशन के चलते कैसा अनर्थ कर रही हैं पूरा पढें…रामायण में बताया गया है कि जब देवी सीता का श्रीराम से विवाह होने वाला होता है, उस समय उनकी माता सुनयना ने उनके बाल बांधते हुए उनसे कहा था, विवाह उपरांत सदा अपने केश बांध कर रखना। बंधे हुए लंबे बाल आभूषण सिंगार होने के साथ-साथ संस्कार ...

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