एक दन अपना स्कूटर से दफ्तर जई रयो थो कि पीछे से एक छोरो दनदनातो आयो ने एकदम से गाड़ी मोड़ दी। हूं गिरते -गिरते बचियो। म्हने उकासे कयो कि दादा, हात दई के तो मुड़तो, अबी म्हारा ने थारा दोई का हात – मुंडा टूटता। ऊ बी रुकी गयो ने म्हारा से बोलियो कि दादा, असा छकड़ा सरीकी गाड़ी चलावगा तो हम कंई करां, हमारा कने इत्तो टेम नी हे तमारा पाछे – पाछे कछुआ सरीको चलने को। इत्तो ग्यान बाँटी ने ऊ फुर्र दनी से निकली गयो।आजकल अपना शहर को ट्राफिक संताप देने वालो हुई गयो हे। सगला अपनी मरजी का मालिक हुई गया हे। जां मन करे गाड़ी घुसई दो। ट्राफिक नियम तो कोई मानने के तय्यार ई नी। लाल, पीली ने हरी बत्ती को तो कंई मतलब ई नी। असो लगे जने ये खाली शहर की सजावट वास्ते लगई ने रखी हे, इनको पालन करने वास्ते नी। हरी बत्ती होना में दस सेकंड रे, पण उका पेलाज लोगना आदा चोराया तक पोची जाय। चालान से बचने वास्ते बी तरे -तरे की तरकीब निकाल ले। म्हारा एक जान – पेचान वाला तो घणा पोमई ने बताय कि म्हने तो आज तक लायसेंस नी बनवायो ने आज तक म्हारो चालान नी बन्यो। ओर आगे बखान करने लग्या कि दादा, अपन चोराया के “अवॉइड” करी ने चलाँ। अपना के शहर का सगला गली – गुच्चा मालम हे ने अंदर ई अंदर से अपन बायर निकली जांय। भोत सा असा समझदार बी रे कि एक – दूसरा के चेतई दे कि आगे भेंकर चेकिंग चली रई हे, तम सीदा हात की गली से निकली जाव। असेज हेलमेट के बी जादातर अपना माथा को बोझ ई माने। भलेज या अपनी सुरक्षा वास्ते हे पण लोगना के हेलमेट पेनने में घणो कंटालो आय। मनख सोचे कि कां इके अवेरता रांगा, इका वास्ते जादातर लोगना हेलमेट खरीदे तो सई पण उके घर में सजई ने धर दे। लोगना कि मानसिकता असी हे कि उनके लगे कि ट्राफिक का नियम मनख के कष्ट देने वास्ते हे, इका वास्ते इनके जित्तो तोड़ी सको, उत्तो तोड़ो ने असो करी के उनके घणो संतोष होय। एक ओर मजेदार बात या हे कि हर मनक दूसरा से ट्राफिक का नियम -कायदा से चलने की आस रखे भलेज खुद उको पालन नी करे। जां मन करे ब्रेक लगई दो, बिना हात दिये मुड़ी जाव, गलत साईड से गाड़ी घुसई दो क्यव कि सड़क तो अपना काकाजी की हे। या विडंबना हे कि जो नेम -कायदा से चले ऊ गमनो केवाय ने जो नेम – कायदा की परवा नी करे ऊ चतरो केवाय। लोगना लाख रुपिया की गाड़ी खरीदने में देर नी करे पण गाड़ी का कग्गज – पत्तर, लायसेंस बनाने में घणो अलस आवे। जित्ती मेनत मनख चालान से बचने वास्ते करे, उत्तीज मेनत नियम का पालन करने ने कग्गज – पत्तर सई रखने में कर ले तो दंड ने चालान से होने वाला फजीता से बी बची सके। डरी – डरी के ने गली -गुच्चा में गाड़ी चलाने से अच्छो हे कि नियम कायदा से माथो ऊँचो करी ने बेफिकरी से गाड़ी चलाव। ट्राफिक में नंबर वन पराया माथे नी होंयगा, इका वास्ते सगला खे नियम – कायदा से चलनो पड़ेगो। अच्छा काम की शुरुवात घर सेई करनी पड़े।ने असो के बी हे कि हम सुधरिया तो जग सुधरियो।
लेख़क :- रजनीश दवे (मालवी साहित्यकार एवं रंगकर्मी)




