Poet’s Corner

हम रीते ही मर जाएंगे…

युद्ध की आहट पर पनपता है प्रेमविदा होते हुए प्रेमीशिद्दत से चूमते हैं एक-दूसरे कोऔर जमा कर लेते हैं इतना प्यार किगुज़ारा हो सके उम्र के आख़री बसंत तक लेकिन सरहद से हज़ारों मील दूरयहाँ इस शांत शहर में, नहीं पहुंचेगी कोई मिसाइल कभीनहीं फटेगा कोई बमनहीं दहलेगी ज़मींनहीं कांपेगा आसमांबंदूके रोक ली जाएंगी सरहदों परनहीं होगा कोई धमाका कभी और ...

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स्मृतियाँ

यहाँ कुछ नहीं ठहरा हैयहाँ कुछ नहीं ठहरेगासिवाय स्मृतियों के….. कुहासे में धुंधलाईतस्वीरों का कोलाज,संवादों की प्रतिध्वनि,और पलकों की कोर से झरी हुईकुछ उपेक्षित कविताएँ ठहरी रहेंगी यहाँसांसों के आने जाने के बीच और ठहरे रहेंगेआत्मा को बिंधते असंख्य नुकीले प्रश्न,रूठी आँखों में जागतीअनमनी प्रतिक्षाएँऔर दोनों ध्रुवों के बीच पसरानिष्ठुर मौन,  कुछ और भी हैजो ठहर जाता है वक्त बेवक़्ततंग रास्तों पर ...

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ड्रिंक एंड ड्राइव

माँ मैं एक पार्टी में गया था।तूने मुझे शराब नहीं पीनेको कहा था, इसीलिए बाकी लोग शराब पीकर मस्ती कर रहे थे और मैं सोडा पीता रहा।लेकिन मुझे सचमुच अपने परगर्व हो रहा थामाँ, जैसा तूने कहा था कि ‘शराब पीकरगाड़ी नहीं चलाना’। मैंने वैसा ही किया।घर लौटते वक्त मैंने शराब को छुआ तक नहीं, भले ही बाकी दोस्तों नेमौजमस्ती ...

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“मां से सीखा है” – मदर्स डे स्पेशल

मां को बच्चों की प्रथम गुरु कहा है।मां हमेशा अपने बच्चों को सही-गलत और जीवन के महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाती है।जीवन में जब भी कुछ समझ नहीं आता, कोई रास्ता नहीं सूझता तो मां से बात करने से उनकी गोद में सिर रखकर अपने मन का हाल उन्हें बताने से हमें नया रास्ता भी मिल जाता है और एक उम्मीद भी ...

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तुम अस्पताल के लिये लड़े कब ?

तुम अस्पताल के लिये लड़े कब ??तुम तो नक्सलियों के साथ देश के विरुद्ध ही लड़ते रहे..तुम तो पुलिस, CRPF और पैरामिलेट्री फोर्स से RDX बिछाकर , बम से उड़ाकर और घात लगाकर लड़ते रहे .. तुम अस्पताल के लिये लड़े कब ?तुम तो कभी नार्थईस्ट, तो कभी पंजाब , तो कभी कश्मीर को भारत से अलग करने के लिये ...

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उन सभी बेटियों को समर्पित, जो दूर, अपने संसार में व्यस्त हैं, और अपने घर गृहस्थी कि कर्तव्य निभा रहीं हैं…

माँ का घर ,जो अब भी नहीं भूला !! बरसों बीत गए ,उस घर से विदा हुए ,बरसों बीत गए ,नई दुनिया बसाए हुए ,पर न जानें क्या बात है ?शाम ढलते ही मन ,उस घर पहुँच जाता है !! माँ की आवाज़ सुनने को ,मन आज भी तरसता है ,महक माँ के खाने की ,आज भी दिल भरमाती है ...

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“मैंने दहेज़ नहीं माँगा”

कुछ महिलाए ऐसी भी है जो अधिकार का दुरप्रयोग कर रही है… साहब मैं थाने नहीं आउंगा,अपने इस घर से कहीं नहीं जाउंगा,माना पत्नी से थोड़ा मन-मुटाव था,सोच में अन्तर और विचारों में खिंचाव था,पर यकीन मानिए साहब, “मैंने दहेज़ नहीं माँगा” मानता हूँ कानून आज पत्नी के पास है,महिलाओं का समाज में हो रहा विकास है।चाहत मेरी भी बस ...

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।। पटाक्षेप ।।

ये विरासतये फलसफेये शोहरतेंये नामावरीये सियासत एक दिनसब रह जाएगापीछे बहुत पीछेजब वक़्त से आगेनिकल जायेंगे हम यकीं नहीं आताजब तलकवह समय नहीं आताआदमी अचानकचला नहीं जाता जिंदगी अच्छी औरसच्ची लगती हैमुस्कुराती हुईहंसती खेलतीनटखट नाटक सी मशीन रुकने सीबंद होती धड़कनेंदिमाग मर जाता कभीमौत हकीकत बन फख्र सेदर्ज होती प्रमाण पत्र में रास्ते ढूंढ़ती हैपगडंडियों से आती हैखुले राजपथ परशान ...

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कहना ज़रूर

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कभी जो आये मन में कोई बातउसे कहना ज़रूरन करना वक्त का इंतज़ारन होना मगरूर । जब पिता का किया कुछदिल को छू जायेतो जाकर गले उनकेलगना ज़रूर।कभी जो आये मन में कोई बातउसे कहना ज़रूर बनाये जब माँ कुछ तुम्हारे मन काकांपते हाथों कोचूम लेना ज़रूर।कभी जो आये मन में कोई बातउसे कहना ज़रूर जब अस्त व्यस्त होके बीबीभूल ...

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माँ… तुम लौट आओ ना!

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बटोही में बनाकर दाल जीरे का छौंक लगाओ ना बहुत भूखा हूँ चूल्हे की गरम रोटी खिलाओ ना दीवाली आ रही है माँ नए कपड़े सिलाओ ना माँ…तुम लौट आओ माँ। बच्चों को पढ़ाकर थककर तुम स्कूल से लौटो अनर्गल मैं आलापों से तुम्हें नाराज़ कर दूं तो जैसे तब दिखाती थीं वही गुस्सा दिखाओ ना माँ…तुम लौट आओ माँ। ...

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