रंग… अब बिदा भये

बासन्ती बयारों के संग आये रंग, फ़ागुण में छाए और जमकर बरसे अगले बरस फिर लौटकर आने का वादा कर छोड़ गए अपनी रंगत चौक-चौबारों, गली-मोहल्लों में छोड़ गए अपने…

बाली का अहंकार

बाली किष्किंधा का राजा था। वह इंद्र का धर्म पुत्र, वृषराज का जैविक पुत्र, सुग्रीव का बड़े भाई और अंगद का पिता अप्सरा तारा के पति था। बाली को वरदान…

आप न्यायाधीश हैं, निर्णय करना आपका काम है

न्यायालय में एक मुकद्दमा आया, जिसने सभी को झकझोर दिया | अदालतों में प्रॉपर्टी विवाद व अन्य पारिवारिक विवाद के केस आते ही रहते हैं| मगर ये मामला बहुत ही…

मत करो घमंड इतना कि मैं किसी को खिला रहा हूँ..

मत करो घमंड इतना कि मैं किसी को खिला रहा हूँ… क्या पता की हम खुद ही किसके भाग्य से खा रहे हैँ…?? एक रेस्टोरेंट में कई बार देखा गया…

“याद”

‘याद’ का ना होना ‘भूलना’ नहीं हैजैसे सुख का ना होना दुख नहीं हैऔर उम्मीद का ना होना नाउम्मीदी से अलग है एक समय के बादहोने और ना होने के…

कभी किसी का विश्वास ना तोड़ें !

एक डाकू था जो साधु के भेष में रहता था। वह लूट का धन गरीबों में बाँटता था। एक दिन कुछ व्यापारियों का जुलूस उस डाकू के ठिकाने से गुज़र…

“एक पिता का करवाचौथ पर बेटी को लिखा गया पत्र”

प्रिय पुत्री, तू ससुराल में ख़ुश होगी । सारा समाज करवाचौथ का त्यौहार मनाने जा रहा है और सभी सुहागन स्त्रियां अपने पति की लम्बी आयु के लिए व्रत रखेंगी।…

अभियंता दिवस विशेष..

ब्रिटेन में एक ट्रेन द्रुत गति से दौड़ रही थी। ट्रेन अंग्रेजों से भरी हुई थी। उसी ट्रेन के एक डिब्बे में अंग्रेजों के साथ एक भारतीय भी बैठा हुआ…

भगवान‍् भावके भूखे हैं

गृहस्थ में रहने वाले एक बड़े अच्छे त्यागी ब्राह्मण पण्डित थे। त्याग केवल साधुओं संतो में ही नहीं होता। गृहस्थ में, सन्यास में, साधु में, सभी में त्याग हो सकता…

रामायण” क्या है ?

“रामायण” भोग की नहीं…. त्याग की कथा हैं..! अगर कभी पढ़ो और समझो तो आंसुओ पे काबू रखना… रामायण का एक छोटा सा वृतांत है, उसी से शायद कुछ समझ…