Poet’s Corner

A collection of Poems. . . .

क्या लाया था

क्या लाया था साथ में जो आया वो जाएगा, दुनिया एक सराय कोई आगे चल दिया, कोई पीछे जाय। क्या लाया था साथ में, क्या जाएगा साथ आना खाली हाथ है, जाना खाली हाथ। सुख में सारे यार हैं, दु:ख में साथी चार इधर प्राण निकले उधर, हुई चिता तैयार। क्या लाया था साथ में क्या जाएगा साथ आना खाली …

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लाचार माँ

” खून की कमी से रोज मरती, बेबस लाचार माँ ” माँ की दवाई का खर्चा, उसे मज़बूरी लगता है उसे सिगरेट का धुंआ, जरुरी लगता है || फिजूल में रबड़ता , दोस्तों के साथ इधर-उधर बगल के कमरे में, माँ से मिलना , मीलों की दुरी लगता है || वो घंटों लगा रहता है, फेसबुक पे अजनबियों से बतियाने …

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दादी माँ

मेरे मन की, पिता के मन की, सारे भावों को जान लेती है। ज़िन्दगी को मुद्दत से देखती आई है, हर दुख-दर्द को सहती आई है। अपने ऊपर हर कष्ट लेकर, आँचल का छाँव देती आई है॥ मेरी दादी माँ, मेरे और मेरे पिता के, संग संग हर पल, हर वक़्त रहती है॥

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गुलाबी ठंडक-गुलाबी मौसम

बदलने मौसम लगा है आजकल,, शामो-सुबह, ठण्ड थोड़ी बढ़ रही दे रही है रोज दस्तक सर्दियाँ, लोग कहते ठण्ड गुलाबी  पड़ रही रूप उनका है गुलाबी फूल सा, पंखुड़ियों से अंग खुशबू से भरे देख कर मन का भ्रमर चचल हुआ, लगा मंडराने, करे तो क्या करे हमने उनको जरा छेड़ा प्यार से, रंग गालों का गुलाबी हो गया नशा …

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माँ तुझे मै क्या दूँ

ऐ माँ तुम्हे मै क्या दू… तन समर्पित मन समर्पित, जीवन का हर छन समर्पित सोचता हु ऐ माँ तुझे और क्या दूँ … छीर सिन्धु के तेरे अमृत ने, पोषित किया मेरा ये जीवन तेरे आँचल से महंगा कोइ वस्त्र नहीं, ढक ले जो सारा तन तेरे ममता के सागर सा, प्यार नहीं पाया कभी ये मन त्याग रत्न …

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अलबेली सरकार सांवरियां

सांवरियां ले चल परली पार कन्हैय्या ले चल परली पार जहाँ विराजे राधा रानी, अलबेली सरकार सांवरियां … गुण अवगुण सब तुझको अर्पण, पाप पुण्य सब तुझको अर्पण, बुद्धि सहित मन तेरे अर्पण यह जीवन भी तेरे अर्पण, मैं तेरे चरणों की दासी, मेरे प्राण आधार सांवरियां… तेरी आस लगा बैठी हूँ लज्जा शील गवां बैठी हूँ, आंखें खूब पका …

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शादी. . .

शादी बर्बादी होती है मुरख है जो यह कहते है शादी से तो घर घर होता है वर्ना चिड़िया घर सा होता है बच्चों को माँ जैसे संभालती है पत्निया पतियों को संभालती है माँ प्यार से घर को एक मंदिर बनाती है पत्निया उस मंदिर को अपनी जतन से आगे बढाती है माँ बेटे का ब्याह रचा बहुएँ घर …

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पुष्प

सुन्दरता है पुष्प की उसकी सुरभि से पहन विविध रंगों के परिधान मुस्कुरातें हैं… काँटों में खिलखिलाते हैं चमकता सूरज… गरजता गगन… बावरी पवन रोक नही पाती… इसकी सहज मुस्कान को आनंद और उल्लास का संदेसा देते ये पुष्प निहाल करते हैं… मन को बहुत भाते हैं…! Author: Jyotsna Saxena (ज्योत्सना सक्सेना)  

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अहसास

आओ फिर से जिएँ, सपने को जीवन में बदलने और जीवन को सपने में ! चलो फिर एक बार लिखे, खुशबू से भरे भीगे ख़त ! जिन्हें पढ़ते-पढ़ते भीग जाते थे हम, इंतज़ार करते थे डाकिये का ! बंद कर के दरवाज़ा, पढ़ते थे चुपके-चुपके ! वे भीगे ख़त तकिए पर सिर रख कर, चौंकते थे आहट पर ! धड़कते …

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प्यार आया

सुप्त अभिलाषाओं को नेहिल स्पर्श से जगाया शुष्क डालियों में… नवजीवन का सुमन खिलाया भीगी पलकों के अश्कों को तुम्हारे एहसासों की तप्त साँसों ने सुखाया उलझी लटों… अल्कों को तुम्हारी उंगलिओं ने हौले से सुलझाया प्यार का रस पीकर उपवन भी हर्षाया कुदरत ने मानो… आशा का मकरंद बरसाया तभी शायद मुझे तुम पर इतना प्यार आया… Author: Jyotsna Saxena …

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