विभिन्न धर्मों में माँ का अस्तित्व

दुनिया के सभी मज़हबों में माँ को बहुत अहमियत दी गई है, क्योंकि माँ के दम से ही तो हमारा वजूद है। ख़ुदा ने जब कायनात की तामीर कर इंसान…

परशुराम जी की माता रेणुका

माता रेणुका का वध स्वयं परशुराम जी ने किया जानिए क्यों?रेणुका राजा प्रसेनजित अथवा राजा रेणु की कन्या, परशुराम की माता और जमदग्नि ऋषि की पत्नी थी जिनके पाँच पुत्र…

3 साल से कम उम्र के बच्चों को अब नर्सरी में प्रवेश नहीं

अब कोई भी माता-पिता अपने बच्चों को निर्धारित उम्र से पहले नर्सरी, केजी और कक्षा-1 में एडमिशन नहीं दिला सकेंगे। अभी तक देखा जाता था कि माता-पिता 2 से 2.5…

निष्काम कर्म का फल

एक गरीब विधवा के पुत्र ने एक बार अपने राजा को देखा। राजा को देख कर उसने अपनी माँ से पूछा- माँ! क्या कभी मैं राजा से बात कर पाऊँगा।…

सब मे राम

तुलसीदास जी जब “रामचरितमानस” लिख रहे थे, तो उन्होंने एक चौपाई लिखी : — सिय राम मय सब जग जानी।करहु प्रणाम जोरी जुग पानी।। अर्थात :- पूरे संसार में श्री…

मर्यादा लांघती राजनीतिक़ बयानबाजी

देश में लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीतिक दलों में बयानों की आंधी सी चल रही हैं। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपने आपको आम जनता का हितैषी सिद्ध…

गारंटी या न्याय : क्या होगी जनता की पसंद

लोकसभा चुनाव की तैयारी के बीच सभी राजनीतिक दल अपने अस्तित्व को प्रभावी बनाने के उद्देश्य को लेकर बयानबाजी कर रहे हैं। इतना ही नहीं विपक्षी राजनीतिक दल केवल वर्तमान…

शिव धनुष (पिनाक) क्यों टूटा

क्या श्रीराम का पिनाक को भंग करना उचित था? माता सीता के स्वयंवर के विषय में हम सभी जानते हैं। इसी स्वयंवर में श्रीराम ने उस पिनाक को सहज ही…

राजनीति में बदल रहे नैतिकता के मायने

भारतीय राजनीति में ऐसे कई उदाहरण दिए जा सकते हैं, जो आज भी नैतिकता के आदर्श हैं। लेकिन आज की राजनीति को देखकर ऐसा लगने लगा है कि नैतिकता की…

कर्म भोग

अवश्यमेव भोक्तव्यंकृतं कर्म शुभाशुभम्। गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है प्रत्येक जीव को अपने किये हुए अच्छे एवं बुरे कर्मों के फल को भोगना पड़ता है। एक गाँव में…